Ye Aisa karz hai Jo Mai Adakar hi Nahi sakta jabtak Mai Ghar wapas na lautuMERI MAA sajde me rehti hai
ऐ खुदा तूने ।।गुल को गुलशन में जगह दी पानी को दरिया में जगह दी पंछियो को आसमान में जगह दी ये खुदा तू उस इंसान को जन्नत में जगह देना जिसने मुझे अपनी कोख़ में 9 महीने जगह दी
बहुत रोते हैं मगर दामन हमारा नम नहीं होता ।इन आँखों के बरसने का कोई मौसम नहीं होता ।मैं अपने दुश्मनों के बीच भी महफूज़ रहता हूँ ।मेरी माँ की दुआओं का ख़जाना कम नहीं होता.
हमारे गुनाहो कि सजा भी अब साथ चलती है हम अब तन्हा नहीं चलते दवा भी साथ चलती है अभी जिन्दा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा मै घर से जब निकलता हू तो दुआ भी साथ चलती है
उसकी एड़ी पर्वत चोटी लगती है,माँ के पाँव से जन्नत भी छोटी लगती है। ❤